HPS-A

Friday, 6 February 2015

Chaitanya godavari grameena bank officers posts

Chaitanya godavari grameena bank

Chaitanya godavari grameena bank- guntur invited for officer,office assistant posts.

Vacancies: officer(scale-1): 69, office assistant: 32

Eligibility: passed any degree with IBPS,RRBS score .

Selection: IBPS,RRBS, cwe-3 score,personal interview .

Online apply last DT: Feb 18
Website: www.cggb.in 

Wednesday, 4 February 2015

bits faculty posts

BITS FACULTY POSTS

Birla Institute of Technology  and Sciences invite applications for on campus,off campus faculty posts.

Vacancies: professor, Asst.professor, associau te professor,lecturers.

Departments: chemical,civil,EEE and Instrumentation,mechanical,management,mathematics,humanities and social sciences,Economics and finance,pharmacy etc.

Vacancy places : pilani, Goa,Hyderabad,Dubai.

Website: www.iitm.ac.in 
Online last date:Feb 25

IIT MADRAS fellow ships

 IIT MADRAS fellow ships

Invite applications for summer fellow ships  in engineering, management, sciences, humanities.

Eligibility: BE/B.TECH/B.Sc(Engineering)/Integrated Me/M.Tech -3yr or ME/M.Tech/M.Sc/MA/MBA 1yr studying candidates are eligible.

Fellow ships for 2 months.
Fellow ship: 5000/-pm.

Apply online website:www.iitm.ac.in
Last date:27 Feb

Friday, 30 January 2015

असफलता सफलता से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है                                                                                     सभी के जीवन में एक समय ऐसा आता है जब सभी चीज़ें आपके विरोध में हो रहीं हों | चाहें आप एक प्रोग्रामर हैं या कुछ और, आप जीवन के उस मोड़ पर खड़े होता हैं जहाँ सब कुछ ग़लत हो रहा होता है| अब चाहे ये कोई सॉफ्टवेर हो सकता है जिसे सभी ने रिजेक्ट कर दिया हो, या आपका कोई फ़ैसला हो सकता है जो बहुत ही भयानक साबित हुआ हो |
लेकिन सही मायने में, विफलता सफलता से ज़्यादा महत्वपूर्ण होती है | हमारे इतिहास में जितने भी बिजनिसमेन, साइंटिस्ट और महापुरुष हुए हैं वो जीवन में सफल बनने से पहले लगातार कई बार फेल हुए हैं | जब हम बहुत सारे कम कर रहे हों तो ये ज़रूरी नहीं कि सब कुछ सही ही होगा| लेकिन अगर आप इस वजह से प्रयास करना छोड़ देंगे तो कभी सफल नहीं हो सकते |
हेनरी फ़ोर्ड, जो बिलियनेर और विश्वप्रसिद्ध फ़ोर्ड मोटर कंपनी के मलिक हैं | सफल बनने से पहले फ़ोर्ड पाँच अन्य बिज़निस मे फेल हुए थे | कोई और होता तो पाँच बार अलग अलग बिज़निस में फेल होने और कर्ज़ मे डूबने के कारण टूट जाता| लेकिन फ़ोर्ड ने ऐसा नहीं किया और आज एक बिलिनेअर कंपनी के मलिक हैं |
अगर विफलता की बात करें तो थॉमस अल्वा एडिसन का नाम सबसे पहले आता है| लाइट बल्व बनाने से पहले उसने लगभग 1000 विफल प्रयोग किए थे |
अल्बेर्ट आइनस्टाइन जो 4 साल की उम्र तक कुछ बोल नहीं पता था और 7 साल की उम्र तक निरक्षर था | लोग उसको दिमागी रूप से कमजोर मानते थे लेकिन अपनी थ्ओरी और सिद्धांतों के बल पर वो दुनिया का सबसे बड़ा साइंटिस्ट बना |
अब ज़रा सोचो की अगर हेनरी फ़ोर्ड पाँच बिज़नेस में फेल होने के बाद निराश होकर बैठ जाता, या एडिसन 999 असफल प्रयोग के बाद उम्मीद छोड़ देता और आईन्टाइन भी खुद को दिमागी कमजोर मान के बैठ जाता तो क्या होता?
हम बहुत सारी महान प्रतिभाओं और अविष्कारों से अंजान रह जाते |
तो मित्रों, असफलता सफलता से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है….. 

Monday, 12 January 2015

हिम्मत मत हारो

हिम्मत मत हारो


एक दिन एक किसान का गधा कुएँ में गिर गया ।वह गधा घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं। अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि गधा काफी बूढा हो चूका था,अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था;और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिऐ।

किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया। सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। जैसे ही गधे कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है ,वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा । और फिर ,अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया।

सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे। तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया। अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह गधा एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था। वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था।

जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे -वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और एस सीढी ऊपर चढ़ आता । जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए वह गधा कुएँ के किनारे पर पहुंच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया।

ध्यान रखो ,तुम्हारे जीवन में भी तुम पर बहुत तरह कि मिट्टी फेंकी जायेगी ,बहुत तरह कि गंदगी तुम पर गिरेगी। जैसे कि ,तुम्हे आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में ही तुम्हारी आलोचना करेगा ,कोई तुम्हारी सफलता से ईर्ष्या के कारण तुम्हे बेकार में ही भला बुरा कहेगा । कोई तुमसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता हुआ दिखेगा जो तुम्हारे आदर्शों के विरुद्ध होंगे। ऐसे में तुम्हे हतोत्साहित होकर कुएँ में ही नहीं पड़े
रहना है बल्कि साहस के साथ हिल-हिल कर हर तरह कि गंदगी को गिरा देना है और उससे सीख लेकर,उसे सीढ़ी बनाकर,बिना अपने आदर्शों का त्याग किये अपने कदमों को आगे बढ़ाते जाना है।

अतः याद रखो !जीवन में सदा आगे बढ़ने के लिए
१)नकारात्मक विचारों को उनके विपरीत सकारात्मक विचारों से विस्थापित करते रहो।
२)आलोचनाओं से विचलित न हो बल्कि उन्हें उपयोग में लाकर अपनी उन्नति का मार्ग प्रशस्त करो।

पेन्सिल की कहानी

पेन्सिल की कहानी


                                                             


एक बालक अपनी दादी मां को एक पत्र लिखते हुए देख रहा था। अचानक उसने अपनी दादी मां से पूंछा,

" दादी मां !" क्या आप मेरी शरारतों के बारे में लिख रही हैं ? आप मेरे बारे में लिख रही हैं, ना "
यह सुनकर उसकी दादी माँ रुकीं और बोलीं , " बेटा मैं लिख तो तुम्हारे बारे में ही रही हूँ, लेकिन जो शब्द मैं यहाँ लिख रही हूँ उनसे भी अधिक महत्व इस पेन्सिल का है जिसे मैं इस्तेमाल कर रही हूँ। मुझे पूरी आशा है कि जब तुम बड़े हो जाओगे तो ठीक इसी पेन्सिल की तरह होगे। "

यह सुनकर वह बालक थोड़ा चौंका और पेन्सिल की ओर ध्यान से देखने लगा, किन्तु उसे कोई विशेष बात 
नज़र नहीं आयी। वह बोला, " किन्तु मुझे तो यह पेन्सिल बाकी सभी पेन्सिलों की तरह ही दिखाई दे रही है।"
इस पर दादी माँ ने उत्तर दिया,
" बेटा ! यह इस पर निर्भर करता है कि तुम चीज़ों को किस नज़र से देखते हो। इसमें पांच ऐसे गुण हैं, जिन्हें 
यदि तुम अपना लो तो तुम सदा इस संसार में शांतिपूर्वक रह सकते हो। "

पहला गुण : तुम्हारे भीतर महान से महान उपलब्धियां प्राप्त करने की योग्यता है, किन्तु तुम्हें यह कभी 
भूलना नहीं चाहिए कि  तुम्हे एक ऐसे हाथ की आवश्यकता है जो निरन्तर तुम्हारा मार्गदर्शन करे। हमारे 
लिए वह हाथ ईश्वर का हाथ है जो सदैव हमारा मार्गदर्शन करता रहता है। "

"दूसरा गुण : बेटा ! लिखते, लिखते, लिखते बीच में मुझे रुकना पड़ता है और फ़िर कटर से पेन्सिल की नोक 
बनानी पड़ती है। इससे पेन्सिल को थोड़ा कष्ट तो होता है, किन्तु बाद में यह काफ़ी तेज़ हो जाती है और अच्छी 
चलती है। इसलिए बेटा ! तुम्हें भी अपने दुखों, अपमान और हार को बर्दाश्त करना आना चाहिए, धैर्य से सहन 
करना आना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से तुम एक बेहतर मनुष्य बन जाओगे। " 

" तीसरा गुण : बेटा ! पेन्सिल हमेशा गलतियों को सुधारने के लिए रबर का प्रयोग करने की इजाज़त देती है।
इसका यह अर्थ है कि यदि हमसे कोई गलती हो गयी तो उसे सुधारना कोई गलत बात नहीं है। बल्कि ऐसा 
करने से हमें न्यायपूर्वक अपने लक्ष्यों की ओर निर्बाध रूप से बढ़ने में मदद मिलती है। "

" चौथा गुण : बेटा ! एक पेन्सिल की कार्य प्रणाली में मुख्य भूमिका इसकी बाहरी लकड़ी की नहीं अपितु 
इसके भीतर के 'ग्रेफाईट' की होती है। ग्रेफाईट या लेड की गुणवत्ता जितनी अच्छी होगी,लेख उतना ही सुन्दर होगा। इसलिए बेटा ! तुम्हारे भीतर क्या हो रहा है, कैसे विचार चल रहे हैं, इसके प्रति सदा सजग रहो। "

"अंतिम गुण : बेटा ! पेन्सिल सदा अपना निशान छोड़ देती है। ठीक इसी प्रकार तुम कुछ भी करते हो  तो तुम भी अपना निशान छोड़ देते हो।
अतः सदा ऐसे कर्म करो जिन पर तुम्हें लज्जित न होना पड़े अपितु तुम्हारा और तुम्हारे परिवार का सिर
गर्व से उठा रहे। अतः अपने प्रत्येक कर्म के प्रति सजग रहो। "

Sunday, 11 January 2015

तेलंगाना के जिले

Telangana Map in Hindi

तेलंगाना का मानचित्र

* तेलंगाना का नक्शा (मानचित्र)

तेलंगाना पर तथ्य

आधिकारिक वेबसाइटwww.telangana.gov.in
स्थापना का दिन2 जून, 2014
सबसे बड़ा शहरहैदराबाद
निर्देशांक18° उत्तर 79° पूर्व
मुख्यमंत्रीके॰ चंद्रशेखर राव
राज्यपालई एस एल नरसिम्हन
उच्च न्यायालयआंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय
क्षेत्रफल114,840 वर्ग किमी
घनत्व310 प्रति वर्ग किमी
जनसंख्या (2011)35,193,978
पुरुषों की जनसंख्या (2011)17,704,078
महिलाओं की जनसंख्या (2011)17,489,900
जिले10
राजधानीहैदराबाद
नदियाँगोदावरी
वन एवं राष्ट्रीय उद्यानशिवराम वन्यजीव अभयारण्य, मंजीरा वन्यजीव अभयारण्य
भाषाएँतेलुगू , उर्दू
पड़ोसी राज्यआंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक
साक्षरता दर (2011)66.50%
1000 पुरुषों पर महिलायें1010
विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र119
संसदीय निर्वाचन क्षेत्र17

तेलंगाना के बारे में


तेलंगाना 2 जून 2014 को भारत का 29 वां राज्य बना। यह राज्य पहले आंध्र प्रदेश का हिस्सा था। भारत की आजादी से पहले यह हैदराबाद राज्य में शामिल था, जिसमें दो संभाग वारंगल और मेडक थे। उस समय इस क्षेत्र में निज़ामों का शासन था। आंध्र प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच हुए टकराव के कारण पिछले कुछ दिनों में यह क्षेत्र काफी सुर्खियांे में रहा था, क्योंकि केन्द्र सरकार इसे एक नया राज्य बनाने पर सहमत थी पर आंध्र प्रदेश ने क्षेत्र की अखंडता के आधार पर इसका विरोध किया था। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार इस क्षेत्र की आबादी 3,52,86,757 है जो कि आंध्र प्रदेश की जनसंख्या का 41.6 प्रतिशत है।

तेलंगाना के गठन का इतिहास


आंध्र प्रदेश से तेलंगाना को अलग राज्य बनाने का आंदोलन बहुत पहले शुरु हुआ था। यूं तो इसे लेकर कई आंदोलन हुए पर जो महत्वपूर्ण थे वह सन् 1969, 1972 और 2009 के थे। वक्त के साथ इन आंदोलनों ने बहुत ज़ोर पकड़ा।

भारत सरकार की आधिकारिक घोषणा के साथ 9 दिसंबर 2009 को तेलंगाना को अलग राज्य बनाने की प्रक्रिया शुरु हुई। इस फैसले पर विरोध जताने के लिए रायलसीमा और तटीय आंध्र क्षेत्र के विधायकों और सांसदों ने अपने इस्तीफे दे दिये।

इस घोषणा के बाद इन क्षेत्रों में कई हिंसक प्रदर्शन भी हुए। नतीजतन भारत सरकार ने 23 दिसंबर 2009 को अलग राज्य बनाने की प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया। हालांकि हैदराबाद और क्षेत्र के अन्य जिलों में तेलंगाना को लेकर आंदोलन निरंतर जारी रहा।

कांग्रेस के आग्रह पर भारत सरकार ने तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया 30 जुलाई 2013 को दोबारा शुरु कर दी। अगले एक दशक के लिए हैदराबाद को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की संयुक्त राजधानी घोषित किया गया। 3 अक्टूबर 2013 को केन्द्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद यह प्रक्रिया पूरी हुई।

मंत्रियों के समूह ;जीओएमद्ध द्वारा तेलंगाना विधेयक पर तैयार किये मसौदे को भारत सरकार ने 5 दिसंबर 2013 को मंजूर किया और फिर उसे संसद के दोनों सदनों में मतदान के लिए पेश किया। 15 वीं लोक सभा ने 18 फ़रवरी 2014 को नए राज्य के गठन के पक्ष में वोट दिया और फिर 20 फ़रवरी 2014 को राज्य सभा ने भी यही किया।

भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 1 मार्च 2014 को इस फैसले को मंजूरी दी और इसके लिए उसी दिन गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया। भारत सरकार ने 4 मार्च 2014 को तेलंगाना को नया राज्य बनाने का एलान किया और 2 जून 2014 को इसका गठन हुआ।

तेलंगाना का भूगोल


सीमाएँ : तेलंगाना राज्य उत्तर और उत्तर पश्चिम दिशा में महाराष्ट्र से घिरा है। कर्नाटक ने इसे पश्चिम की ओर से घेरा है और छत्तीसगढ़ इसके उत्तर पूर्व में है। तेलंगाना के पूर्व में उड़ीसा है।

फैलाव : कुल मिलाकर यह क्षेत्र 1,14,840 किमी तक फैला है जो कि 44,34. वर्ग मील के बराबर है।

नदियां : इस प्रांत की सबसे महत्वपूर्ण नदियां मूसी, कृष्णा, मंजीरा और गोदावरी हैं।

शहर : तेलंगाना के सबसे बड़े शहर हैदराबाद, निजामाबाद, वारंगल और करीमनगर हैं।

जब से तेलंगाना के गठन की घोषणा हुई आंध्र प्रदेश के विभिन्न नेताओं ने इसका पुरजोर विरोध किया। हालांकि एक बड़ी घटना 13 फ़रवरी 2014 को घटी जब लोक सभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने 12 बजे इस बिल को पेश करने की अनुमति दी। विजयवाड़ा के तत्कालीन कांग्रेस सांसद लगड़ापति राजगोपाल ने जोरदार नारों के बीच संसद में पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया। राजगोपाल ने बाद में कहा कि उन्होंने यह कदम दूसरे सांसदों के हमले से खुद को बचाने के लिए आत्मरक्षा में उठाया। उनके इस कदम से लोक सभा की कार्यवाही में अड़चनें आईं और निचली संसद के कुछ सदस्यों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।

जनसांख्यिकी


तेलंगाना में 10 जिले हैं और सन् 2011 की जनगणना के अनुसार उनकी आबादी निम्न तालिका अनुसार है। सन् 2011 में हुई जनगणना के आंकड़ों के अनुसार तेलंगाना की जनसंख्या 4,93,86,799 है। यहां पुरुषों और महिलाओं की आबादी क्रमशः 1,77,04,078 और 2,46,48,731 है। इस राज्य का कुल क्षेत्रफल 1,33,103 वर्ग किमी है और यहां का जनसंख्या घनत्व 296 प्रति वर्ग किमी है। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश के जिलों की कुल साक्षरता दर 66 प्रतिशत है।

अर्थव्यवस्था


कृषि तेलंगाना का एक सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है। स्थानीय तौर पर यहां कपास, आम और तंबाकू की फसलें उगाई जाती हैं। तेलंगाना की दो प्रमुख नदियों कृष्णा और गोदावरी की वजह से राज्य में सिंचाई की अच्छी सुविधा है। वित्तीय वर्ष 2012-13 में तेलांगना का सकल राज्य घरेलु उत्पाद ;जीएसडीपीद्ध 1,96,182 करोड़ रुपये था। नागार्जुन सागर बांध और गोदावरी नदी घाटी सिंचाई परियोजना राज्य की बहु-राज्य सिंचाई परियोजनाएं हैं। सूचना प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी के मामले में तेलंगाना देश के शीर्ष निर्यातक राज्यों में से है। सिंगरेनी काॅयलेरीज़ में मौजूद कोयला भंडार के कारण तेलंगाना को एक खनिज समृद्ध राज्य माना जाता है। वित्तीय वर्ष 2012-13 में कृषि और संबंधित क्षेत्रों की जीएसडीपी 27,450 करोड़ रुपये और औद्योगिक क्षेत्र के लिए 54,687 करोड़ रुपये थी।

परिवहन


तेलंगाना राज्य में आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन द्वारा बस सेवा संचालित की जाती है और प्रदेशभर में इसकी हजारों बसें चलती हैं। यह बसें गांवों सहित राज्य के कई भागों में चलती हैं और सड़कों के विशाल नेटवर्क के चलते राज्य के विभिन्न हिस्सों से जुड़ना आसान है। यह राज्य दक्षिण मध्य रेलवे के तहत आता है। दक्षिण मध्य रेलवे के दो प्रमुख मंडल हैं, हैदराबाद और सिकंदराबाद जो इस राज्य में ही आते हैं। राज्य का सबसे बड़ा हवाई अड्डा राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है और यह देश का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है। सरकार करीमनगर और कोथगुडेम में हवाई अड्डे बनाने और रामागंम हवाई अड्डा, निजामाबाद एयरपोर्ट और वारंगल एयरपोर्ट को अपग्रेड करने की योजना पर काम रही है।

समाज और संस्कृति


तेलंगाना की ज्यादातर आबादी तेलगु बोलती है। राज्य के कुछ हिस्सों में उर्दू भी काफी बोली जाती है। राज्य की संस्कृति पर फारसी रीति रिवाजों का प्रभाव है जो कि निज़ामों और मुगलकाल से आया है। कई हिंदू त्यौहार जैसे दीपावली, श्री रामनवमी, गणेश चतुर्थी और महाशिवरात्री और मुस्लिम त्यौहार जैसे बकरीद, ईद-उल-फितर यहां मनाए जाते हैं। बताउकम्मा त्यौहार और लश्कर बोनालु तेलंगाना राज्य के त्यौहार हैं।

भाषा


तेलगु तेलंगाना की आधिकारिक भाषा है, हालांकि कुछ लोग यह दावा भी करते हंै कि तेलंगाना में बोलीे जाने वाली तेलगु, आंध्र प्रदेश में बोली जाने वाली तेलगु से अलग है। तेलगु भाषा में संस्कृत, उर्दू और अंग्रेजी के शब्द शामिल हैं। सन् 1948 से पहले उर्दू हैदराबाद की आधिकारिक भाषा थी लेकिन बाद में हैदराबाद के भारत गणराज्य में शामिल होने पर यह सरकारी भाषा बन गई। राज्य में स्कूलों और काॅलेजों में पढ़ाई का माध्यम भी तेलगु ही है।

सरकार और राजनीति


भारत के अन्य राज्यों की तरह तेलंगाना में भी संसदीय प्रणाली है। यह प्रणाली तीन विभिन्न शाखाओं में बँटी है। राज्य के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्री परिषद् के पास कार्यकारी अधिकार होते हैं। राज्य की विधानसभा में 119 सदस्य और विधान परिषद् में 40 सदस्य हैं। निचली अदालतों और हैदराबाद हाई कोर्ट के पास तेलंगाना की न्यायिक व्यवस्था की जिम्मदारी है। राज्य के प्रमुख राजनीतिक पार्टियां तेलंगाना राष्ट्र समिति ;टीआरएसद्ध, तेलगु देशम पार्टी ;तेदेपाद्ध और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस हैं। संसद द्वारा फरवरी 2014 में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014 बिल पास करने पर तेलंगाना का गठन हुआ जिसमें उत्तर-पश्चिमी आंध्र प्रदेश से 10 जिले तेलंगाना में चले गए। तेलंगाना राज्य का गठन आधिकारिक तौर पर 2 जून 2014 को हुआ।

शिक्षा


कई सरकारी और निजी स्कूलों के अलावा राज्य में बहुत सारे उच्च शिक्षा संस्थान और विश्वविद्यालय हैं। राज्य के स्कूल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, आईसीएसई या राज्य बोर्ड से संबद्ध हैं। यहां कई शोध संस्थान, काॅलेज और विश्वविद्यालय हैं, जो मानविकी, लाॅ और मेडिसिन आदि में व्यवसायिक शिक्षा देते हैं। हैदराबाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद स्थित आईआईआईटी और वारंगल का राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राज्य के कुछ प्रमुख शिक्षा संस्थान हैं। हैदराबाद के इलेक्ट्राॅनिक्स काॅरपोरेशन आॅफ इंडिया और टाटा इंस्टीट्यूट आॅफ फंडामेंटल रिसर्च राज्य के कुछ प्रसिद्ध शोध संस्थानों में से एक हैं।

इसे तेलंगाना क्यों कहा जाता है?


तेलंगाना और राज्य में बोली जाने वाली प्रचलित भाषा दोनों ही नाम त्रिलिंगा या त्रिलिंगा देसा शब्द से आए हैं, जिसका अर्थ होता है तीन लिंग वाला देश। हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिवलिंग के रुप में तीन पहाड़ों पर आए जो कि कलेश्वरम, द्रकक्षरशम और श्रीशैलम थे। माना जाता है कि कृष्णा और गोदावरी नदी के बीच कहीं स्थित इन पहाड़ों ने इस क्षेत्र की सीमा के रुप में काम किया। यह शब्द तेलगु बोले जाने वाले क्षेत्र को मराठी प्रभुत्व वाले इलाके से अलग करते हुए इसे हैदराबाद राज्य का भाग भी बनाता है।

तेलंगाना क्यों बनाया गया?


तेलंगाना के समर्थकों ने नए राज्य के समर्थन में कई क्षेत्रों जैसे जल संसाधनों का वितरण, नौकरी और बजट के आवंटन में भेदभाव का हवाला दिया। यह क्षेत्र आंध्र प्रदेश के राजस्व में 62 प्रतिशत का योगदान देता था। यह भी कहा गया है कि यहां कृष्णा और गोदावरी का लगभग 69 प्रतिशत जलग्रहण क्षेत्र होने के बाद भी इसे विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं से सिर्फ 19 प्रतिशत का ही फायदा मिला।

एक आरोप यह भी लगाया गया कि तेलंगाना के विकास के लिए मिले धन को राज्य सरकार ने कई सालों तक खर्च नहीं किया।

प्रोफेसर जयशंकर के अनुमान के मुताबिक सिर्फ 20 प्रतिशत सरकारी कर्मचारियों को इस क्षेत्र से भर्ती किया गया। जहां तक सचिवालय का सवाल है तो इसमें यह आंकड़ा मात्र 10 प्रतिशत है और तेलंगाना के सिर्फ 5 प्रतिशत अधिकारी ही विभिन्न विभागों का नेतृत्व करते हैं। आंध्र के पिछले 50 सालों के इतिहास में तेलंगाना से किसी भी मुख्यमंत्री ने सिर्फ साढ़े छह साल ही पद संभाला।

तेलंगाना के समर्थक यह भी कहते हैं कि विधानसभा और यहां के लोकसभा सदस्यों ने कई समझौते तोड़े, वादे और योजनाएं पूरी नहीं की और राज्य को शोषित, अनदेखा करके पिछड़ेपन की ओर धकेल दिया।

तेलंगाना के गठन में विवाद और आपत्तियां


तेलंगाना के गठन की घोषणा के बाद से ही आंध्र प्रदेश के विभिन्न नेताओं ने इसका बहुत विरोध किया। हालांकि एक बड़ी घटना 13 फ़रवरी 2014 को घटी जब लोक सभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने 12 बजे इस बिल को पेश करने की अनुमति दी। विजयवाड़ा के तत्कालीन कांग्रेस सांसद लगड़ापति राजगोपाल ने जोरदार नारों के बीच संसद में पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया। राजगोपाल ने बाद में कहा कि उन्होंने यह कदम दूसरे सांसदों के हमले से खुद को बचाने के लिए आत्मरक्षा में उठाया। उनके इस कदम से लोक सभा की कार्यवाही में अड़चनें आईं और निचली संसद के कुछ सदस्यों को अस्पताल में भर्ती भी करना पड़ा।

इस हरकत के परिणाम के तौर पर आंध्र के कई लोक सभा सदस्यों का निलंबन हुआ। यह सदस्य थेः

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से
  • सब्बम हरि
  • ए साई प्रताप
  • अनंत वेंकटर्मी रेड्डी
  • सुरेश कुमार शेतकर
  • राज्यपति संभाशिवा राव
  • के आर जी रेड्डी
  • एस पी वाय रेड्डी
  • बापी राजू कनुमोरी
  • एम श्रीनिवासुलु
  • जी सुखेंदर रेड्डी
  • वी अरुणा कुमार

तेलगु देसम पार्टी से
  • निरामली शिवाप्रसाद
  • के नारायणा राव
  • लिम्मला क्रिस्टप्पा

वायएसआर कांग्रेस से
  • एम राजामोहन रेड्डी
  • वाय जगनमोहन रेड्डी

इसके साथ ही आंध्र प्रदेश की विधानसभा और विधान परिषद ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014 का विरोध किया। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में 9 याचिकाएं भी दाखिल हुईं।

तेलंगाना के गठन का प्रभाव


राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक तेलंगाना के गठन के कई प्रभाव हो सकते हैं। इसके समर्थन में जो सबसे अहम तर्क दिया जाता है वह यह है कि तेलंगाना जैसे एक छोटे राज्य का प्रशासन संभालना आसान होगा। हालांकि झारखंड के अनुभव को देखते हुए यह तर्क कमजोर ही लगता है। यह भी माना जाता है कि तेलंगाना के गठन से देश में और अस्थिरता आएगी क्योंकि इससे अन्य आंदोलनों जैसे गोरखालैंड, विदर्भ और बोडोलैंड के लिए जारी आंदोलनों को बल मिलेगा।

तेलंगाना के जिले


क्र.सं.जिला का नामजिला मुख्यालयजनसंख्या (2011) विकास दर लिंग अनुपात साक्षरता क्षेत्र (वर्ग किमी) घनत्व (/ वर्ग किमी)
1आदिलाबादआदिलाबाद274123910.18%100161.0116105170
2हैदराबादहैदराबाद39433232.97%95483.2518480217
3करीमनगरकरीमनगर37762698.15%100864.1511823322
4खम्ममखम्मम27973708.47%101164.8116029175
5महबूबनगरमहबूबनगर405302815.34%97755.0418432219
6मेदकसांगरेड्डी303328813.60%99261.429699313
7नलगोंडानलगोंडा34888097.41%98364.214240245
8निजामाबादनिजामाबाद25513358.77%104061.257956321
9रंगारेड्डीहैदराबाद529674148.16%96175.877493707
10वारंगलवारंगल35125768.21%99765.1112846274


अंतिम संशोधन : दिसंबर 15, 2014

Friday, 12 December 2014

For You...

     

Success thoughts in Hindi

 

*समस्त सफलताएं कर्म की नींव पर आधारित होती हैं | ~ एंथनी रॉबिन्स

सफलता का कोई रहस्य नहीं है, वह केवल अत्यधिक परिश्रम चाहती है | ~ हेनरी

जिसने अपने को वश में कर लिया है, उसकी जीत को देवता भी हार में नहीं बदल सकते | ~ गौत्तम बुद्ध

*जिस व्यक्ति में सफलता के लिए आशा और आत्मविश्वास है, वही व्यक्ति उच्च शिखर पर पहुंचते हैं | 

लगातार प्रयत्न करने वाले लोगों की गोद में सफलता स्वयं आकर बैठ जाती हैं | ~ भारवि

*कुछ लोग सफलता के सपने देखते हैं जबकि अन्य व्यक्ति जागते हैं और कड़ी मेहनत करते हैं| ~ महात्मा गांधी

* सच्चा प्रयास कभी निष्फल नहीं होता | ~ विल्सन 

*ऊद्यम ही सफलता की कुंजी है।

*महान संकल्प ही महान फल का जनक होता है | ~ हजारी प्रसाद द्विवेदी

*एकाग्रता से ही विजय मिलती है।

*वही सफल होता है, जिसका काम उसे निरन्तर आनन्द देता है | ~ थोरो

*ध्येय की सफलता के लिए पूर्ण एकाग्रता और समर्पण आवश्यक है | ~ ब्राउन

*सफलता में दोषों को मिटाने की विलक्षण शक्ति है | ~ प्रेमचन्द 

*अपने ऊपर विजय प्राप्त करना, सबसे बड़ी विजय है | ~ अज्ञात

*एक सफ़ल मनुष्य होने के लिये सुदृढ़ व्यक्तित्व की आवश्यकता है | ~ अज्ञात

*असफलता का मतलब यह नहीं कि आप असफल हैं, इसका मतलब सिर्फ इतना है कि आप अब तक सफल नहीं हो पाए हैं| ~ रॉबर्ट शुलर

*यदि आप सफल होना चाहते हैं, तो अपना ध्यान समस्या खोजने में नहीं समाधान खोजने में लगाइए |

*सफलता कर्म करने से मिलती है |

*अपनी असफलताओं को खुद पर हावी मत होने दो, बल्कि असफलताओं को ही अपनी सफलता की सीढी के रूप में इस्तेमाल करो |

*दुनिया आपको मुफ्त में कुछ नहीं देती | सफलता जैसी बेशकीमती चीज तो बिलकुल नहीं | अतः सफलता का पकवान चखने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी |

*सफल व्यक्ति वही है जो सुबह उठकर पहले यह तय करता है कि आज उसे क्या-क्या काम करने है और रात तक वह उन सारे कामों को कई परेशानियों के बाद भी पूरा कर लेता है 

*सफलता अत्यधिक परिश्रम चाहती है।

*जीवन में सफलता का रहस्य, हर आने वाले अवसर के लिए तैयार रहना है | ~ डिजरायली

*आत्मविश्वास सफलता का प्रमुख रहस्य है | ~ इमर्सन

*असफलता केवल यह सिद्ध करती है कि प्रयत्न पूरे मन से नहीं हुआ | ~ श्रीराम शर्मा आचार्य

*जो पढ़ते हो, उसे अमल में लाना सीखो, यही उन्नति का मार्ग है | ~ स्वामी रामतीर्थ

*सिर्फ सपनों से कुछ नहीं होता, सफलता प्रयासों से हासिल होती है | ~ अज्ञात

*पारस्परिक व्यवहार प्रगति का सार है | ~ बक्टन

*प्रत्येक सफल और सुन्दर रचना के पीछे विश्वास, आशा, आकांक्षा, हृदय की प्रबल इच्छा अवश्य विद्यमान रहती है
* '' भले ही दुष्ट व्यक्ति के साथ आप कितनी भी भलाई करे, वह दुष्टता नहीं छोड़ता और समय पड़ने पे आप का बुरा करने से भी नहीं चूकता । रहीम"

 "You may do as much goodness to a wicked person, but he will never leave wickedness and in the future, he may not hesitate in harming you. Rahim"

*"किसी को अपना शत्रु मत बनाओ क्योंकि सौ मित्रों के होते हुए भी वह आपको हानि पहुंचा सकता है।"

"Do not make anyone your enemy because despite having hundred friends he can hurt you." 

*"दुनियाँ की हर चीज़ ठोकर लगने से टूट जाती है। एक "कामयाबी" ही है, जो ठोकर खाकर ही मिलती है।"  

"Everything in the world breaks with a stumble. Only it is "Success" which we get when we stumble.



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Tuesday, 9 December 2014

హిందీ ప్రచార సభ హైదరాబాద్ వారి AUGUST హిందీ పరీక్షల ఫీజుకు గడువు :30-04-2015

                                HINDI EXAMS AUGUST 2015                                                                                                                  

     హిందీ ప్రచార సభ హైదరాబాద్ వారి August హిందీ పరీక్షల ఫీజుకు గడువు  :   30-04-2015

                                                                                                                                                                     హిందీ ప్రచారసభ హైదరాబాద్ వారు AUGUST 2015 లో నిర్వహించే హిందీ పరీక్షలకు APRIL 30 వరకు ఫీజు చెల్లించవచ్చని భీంగల్ జిల్లా పరిషత్ ఉన్నత పాటశాల హిందీ ప్రచారసభ కేంద్ర వ్యవస్థాపకులు  యన్.చంద్రకళ తెలిపారు.5.6 తరగతులు పాసైనవారు హిందీ  ఉత్తమ పరీక్షకు, 7,8,9 తరగతి పాసైనవారు హిందీ విశారద (SSC స్థాయి) పరీక్షకు, SSC పాసైనవారు హిందీ భూషణ్ (INTER స్థాయి) పరీక్షలకు, ద్వితీయ భాష హిందీ తో ఇంటర్,డిగ్రీ లేదాభూషణ్  పాసైనవారు హిందీ విద్వాన్ (BA స్థాయి )  పరీక్షలకు అర్హులు. విద్వాన్ పాసైనవారు హిందీ పండిత్ ట్రైనింగ్ ( HPT) చేయడానికి అర్హులని తెలిపారు.అధిక వివరాలకు Contact అడ్రస్  లో సంప్రదించాలని కోరారు.

                                                 (  see more details in courses offered  )

contact:

N CHANDRAKALA                                                                               
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"यदि आप सफलता चाहते हैं तो इसे अपना लक्ष्य ना बनाइये, सिर्फ वो करिए जो करना आपको अच्छा लगता है और जिसमे आपको विश्वास है, और खुद-बखुद आपको सफलता मिलेगी|"
"सफल होने के लिए, सफलता की इच्छा, असफलता के भय से अधिक  होनी चाहिए|"